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यूजीसी की स्टैंडिंग कमिटी में पहली बार प्रायवेट यूनिवर्सिटी का रिप्रेज़ेंटशन, डॉ. धर बने सदस्य

इंदौर. देश की सभी 903 यूनिवर्सिटीज़ में चलाए जाने वाले कोर्सेस के नाम तय करने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) ने नॉमेनक्लेचर कमिटी बनाई है। इस स्टैंडिंग कमिटी में देश की नामी यूनिवर्सिटीज़ के पूर्व कुलपति और निदेशक सदस्यों के रूप में मौजूद हैं। वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. उपिंदर धर को इस कमिटी में सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।

ये पहला मौका है जब देश की किसी भी प्रायवेट यूनिवर्सिटी से जुड़े व्यक्ति को इस कमिटी में शामिल किया गया है। देश के नामी शिक्षाविदों के साथ मिलकर वे विभिन्न कोर्स के नामों से जुड़े मसलों को सुलझाने के साथ ही नए कोर्सेस के नाम भी तय करेंगे।

ये हस्तियां शामिल हैं नॉमेनक्लेचर कमेटी में
यूजीसी के मेम्बर और जेएनयू के पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर एम. जगदीश इस कमेटी के चेयरमेन हैं।इसके अलावा सेंट्रल यूनिवर्सिटी हरियाणा के पूर्व कुलपति आर.सी. कुहाड़, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ के सेक्रेटरी जनरल प्रो. फुरकान कमर, आईसर भोपाल के पूर्व निदेशक प्रो. विनोद कुमार सिंह, एम्स के पूर्व निदेशक आर.सी. डेका, आईआईएम रोहतक के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन सी.के. कोकाटे, एनएलयू भोपाल के वीसी वी. विजय कुमार, यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास के पी दुरई स्वामी सहित कुल 14 लोग इस कमेटी में शामिल हैं।

विदेशों में भी स्वीकार्य होना चाहिए नए कोर्स का नाम
डॉ. धर ने बताया- नए कोर्स के नामों को लेकर यूजीसी के अपने कुछ नियम हैं। कोई यूनिवर्सिटी यदि नया कोर्स शुरू करती है तो नाम के लिए इस कमिटी से अप्रूवल लेना होता है। नाम उचित न हो तो कमिटी अपनी ओर से सुझाती है। पहले कई यूनिवर्सिटीज़ में एमबीई, एमपीए, एमएमएम, एमसीएम, एमआईबी जैसे कोर्स चला करते थे। कमिटी की सलाह पर कुछ कोर्स बंद किए गए। कई का नाम बदल कर एमबीए विद स्पेशलाइज़ेशन किया। कमेटी यह भी देखती है कि कोर्स के नाम को विदेशों में मान्यता मिलेगी या नहीं।

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